देवली के अटल उद्यान स्थित टीनशैड प्लेटफार्म पर चल रही 15 दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ महामहोत्सव में कथा वाचन कर रहे महामंडलेश्वर 1008 दिव्य मुरारी बापू ने कहा कि धर्म, सत्कर्म और आध्यात्मिक विद्या ज्ञान के बिना मनुष्य का जीवन बेकार है।
उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद ने कहा कि मनुष्य दूसरे जीवों से तीन विशेषता अधिक रखता है। मनुष्य दूसरे जीव जन्तुओं से धर्म में बड़ा है, कर्म में बड़ा है और ज्ञान में बड़ा है। जिस मनुष्य के जीवन में न तो कोई धर्म है, न सत्कर्म है और न तो आध्यात्मिक विद्या का ज्ञान है ऐसा व्यक्ति पृथ्वी पर विचरण करने वाले दूसरे जीवों के समान ही है। यह बात नीति में भी कही गयी है। कथा के दौरान प्रभु श्रीराम की बाल लीलाओं की चर्चा करते हुए कहा कि प्रभु श्री राम की लीलाओं में प्रसिद्ध बाल लीला है। आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाय तो दशरथजी ज्ञान के स्वरूप हैं और महारानी कौशल्या भक्ति स्वरूपा हैं। ईश्वर को भक्ति ही गोद में लाकर बैठा सकती है। इसलिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भगवान की भक्ति ही है। सारे साधन करके साधक को भक्ति प्राप्त करना चाहिए। प्रभु श्री राम चारों भाइयों का यज्ञोपवीत संस्कार बताया। इसके बाद प्रभु गुरुदेव वशिष्ठ के गुरुकुल में विद्या अध्ययन करने जाते हैं और थोड़े समय में समस्त विद्या प्राप्त कर लेते हैं। भगवान से ही सारी विद्या प्रकट हुई है। विद्या अध्ययन लीला जगत के शिक्षा के लिये है ताकि हर कोई शिक्षा ले सके कि जीवन में ज्ञान प्राप्त कर सके, ज्ञान प्राप्त करना अति आवश्यक है।
श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ : धर्म, सत्कर्म और आध्यात्मिक विद्या ज्ञान के बिना मनुष्य का जीवन बेकार है - मुरारी बापू










