देवली में अब्दुल पहलवान अली शाह वली (रह.) का सालाना दो दिवसीय उर्स मुबारक का आयोजन शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर अ. खालिक अब्बासी की अगुवाई में किया गया।
समाज के प्रतिनिधि मोहम्मद इदरीस व हारून अंसारी ने बताया कि चादर शरीफ का जुलूस शाही जामा मस्जिद से मज़ार शरीफ ( दरगाह) के लिए रवाना किया गया जिसमें जहाजपुर से आए बैंड ने स्वर लहरियां बिखेरी तुम जो चाहो तो हर फूल की तासीर बदल दो, बिगड़ी हुई हर एक शख्स की तक़दीर बदल दो। असर की नमाज़ से पहले दरगाह शरीफ़ पर इंतजामिया कमेटी एवं दूरदाज से आए अकीदत मंद जायरीनों के सान्निध्य में बाबा साहब को चादर और गुलपोशी पेश की गई। शाम को लंगर प्रसादी का भोज करवाया गया। अजमेर शरीफ़ से आए से आए कव्वाल नौशाद शोला अजमेरी ने एक से बढ़कर एक कव्वाली - सुफियाना कलाम पेश की। भर दो झोली मेरे या मुहम्मद, लौट कर आज में ना जाऊंगा खाली, शाह ए समंदर, पिया हाजी पिया हाजी अली, शोला ब्रदर्स के सिंगर नौशाद शोला ने ताजदारे ए हरम निगाहे करम, दमा दम मस्त कलंदर अली दम दम के अंदर, दुल्हन बनी है दिल्ली आज दुल्हा बना है ख्वाजा अजमेर की गलियों में, सूफियाना कलाम पेश कर के अकीदत मंद जायरिनो को झूमने पर मजबूर कर दिया।
उर्स मुबारक : चादर शरीफ का जुलूस निकाला, कव्वालों ने सुफियाना कलाम पेश किए










