देवली के अटल उद्यान स्थित टीनशैड प्लेटफार्म पर चल रही 15 दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ महामहोत्सव में कथा वाचन कर रहे महामंडलेश्वर 1008 दिव्य मुरारी बापू ने कहा कि जिस श्राप से भगवान के दर्शन हो जाए वह श्राप नहीं आशीर्वाद होता है।
उन्होंने बताया कि अयोध्या से जनकपुरी के रास्ते में जब भगवान ने गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का उद्धार किया तो अहिल्या ने अपने पति की कोई भी गलती नहीं बताते हुए कहा कि उन्होंने मुझे पत्थर की शिला में परिवर्तित होने का श्राप नहीं, आशीर्वाद दिया था। अगर वह आशीर्वाद नहीं देते तो आज मुझे राम के दर्शन कैसे होते। इससे पूर्व भगवान राम ने ताड़का का वध किया तथा लक्ष्मण ने जंगल के समस्त राक्षसों का वध कर विश्वामित्र के आश्रम की रक्षा की। इससे प्रसन्न होकर मुनि विश्वामित्र ने दोनों भाइयों को बला और अतिबला नामक विद्याएं प्रदान की, जिससे राम और लक्ष्मण को भूख, प्यास और थकान महसूस नहीं होती है। इसके बाद सिद्धाश्रम पहुंचकर राम और लक्ष्मण ने मरीच और सुबाहु जैसे राक्षसों का वध कर उद्धार किया। उन्होंने कहा कि अविद्या ही मनुष्य को असुर बना देती है। भगवान के सामने रोने वाले व्यक्ति को किसी के सामने नहीं रोना पड़ता।
श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ : जिस श्राप से भगवान के दर्शन हो जाए वह श्राप नहीं आशीर्वाद है - मुरारी बापू










