देवली के अटल उद्यान टीनशैड प्लेटफार्म पर चल रही 15 दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ महामहोत्सव में कथा वाचन कर रहे महामंडलेश्वर 1008 दिव्य मुरारी बापू ने कहा कि मानसिक व भावनात्मक असंतुलन ही शारीरिक व्याधियों का प्रमुख कारण है।
उन्होंने कहा कि जीवन में यदि समता है तो समझो आप शरीर से भी स्वस्थ हैं, मन से भी स्वस्थ हैं। जीवन में समता नहीं तो आप न शरीर से स्वस्थ होंगे और न ही मन से। आज की पीढ़ी में क्रोध, प्रतिक्रिया, प्रतिस्पर्धा और असहिष्णुता का ऐसा दौर बढ़ रहा है कि वे छोटी-छोटी बातों की मन में गांठ बांध लेते हैं। ये गांठे ही आगे जाकर कैंसर जैसी असाध्य बीमारियों की सर्जक है। इन असाध्य रोगों से मुक्त होने के लिये मन को सरल व सहज बनाना होगा। क्षमा करना व क्षमा मान लेना सीखना होगा। छोटी-छोटी बातों की गांठे बांधनी छोड़नी होगी। श्री रामचरितमानस के प्रारम्भ में भगवती पार्वती ने भगवान शंकर से चौदह प्रश्न किये और इन्हीं चौदह प्रश्नों के उत्तर में भगवान शंकर ने भगवती पार्वती को माध्यम बनाकर सम्पूर्ण श्री राम कथा सुनाया था। कथा के दौरान महिलाओं ने भाव विभोर होकर नृत्य किया। कथा का समापन आरती व प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ : मानसिक व भावनात्मक असंतुलन ही शारीरिक व्याधियों का प्रमुख कारण है - मुरारी बापू










