देवली के अटल उद्यान स्थित टीनशैड प्लेटफार्म पर चल रही 15 दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ महामहोत्सव में कथा वाचन कर रहे महामंडलेश्वर 1008 दिव्य मुरारी बापू ने कहा कि काम, क्रोध, लोभ, मोह व मद नामक विकारों पर धैर्य एवं विवेक से ही नियंत्रण मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि यह आवश्यक नहीं है कि व्यक्ति के लिए सफलता प्राप्ति ही लक्ष्य होता है यदि सफलता के साथ-साथ कभी असफल भी होना पड़े तो धैर्य तथा हिम्मत नहीं खोनी चाहिए। अगर हिम्मत गंवा दी गई तो सफलता उससे बहुत दूर चली जायेगी। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के अमर वाक्य की चर्चा करते हुए कहा कि कदम चूम लेती है खुद आके मंजिल, मुसाफिर अगर अपनी हिम्मत न हारे। उन्होंने बताया कि स्वामी कहा करते थे कि व्यक्ति को अपने लक्ष्य की तरफ तब तक प्रयत्न करना चाहिए, जब तक उसे अपने लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाये। कथा के दौरान कामदेव व पत्नी रति का प्रसंग सुनाया। सीताराम जी, गौरीशंकर जी व राधाकृष्ण जी अनादि दम्पति हैं। इस दौरान शिव विवाह का प्रसंग सुनाते हुए शिव विवाह का सजीव चित्रण किया गया तथा शिव पार्वती की सजीव झांकी भी सजाई गई। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के साथ साथ पुरुषों ने भी भजनों पर नृत्य किया तथा कथा का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ : शिव पार्वती की सजाई सजीव झांकी











