देवली के अटल उद्यान स्थित टीनशैड प्लेटफार्म पर चल रही 15 दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ महामहोत्सव में कथा वाचन कर रहे महामंडलेश्वर 1008 दिव्य मुरारी बापू ने कहा कि राम शब्द का अर्थ है सबको आराम देने वाला, इसीलिए भगवान का नाम राम है। परमात्मा का नाम साधन भी है और साध्य भी है। यही जीवन का आखिरी प्रातव्य भी है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का चार रूप में अवतार हुआ श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न। भारतीय संस्कृति में 16 संस्कार बताये गये हैं। जब गर्भ में सातवां महीना होता है तब भी एक पूजा होती है। जन्म के बाद सबसे पहला जातकर्म संस्कार होता है जिसमें पितृ देवताओं की पूजा होती है। प्रभु श्री राम का जातकर्म संस्कार हुआ। नन्हा सा बच्चा माता-पिता, परिवार, समाज आगे चलकर शिक्षण संस्थाओं और धार्मिक संस्थाओं से संस्कार प्राप्त करता है। सबको मिलकर ऐसा वातावरण देना चाहिए कि हमारे बच्चों में अच्छे संस्कार आये। उन्होंने बताया कि धन्ना भगत द्वारा खेत में बोने वाले गेंहू को महात्माओं के भंडारे में लगा दिया तथा खेत में रेत बोने का नाटक किया। इसका अर्थ है कि जो धन संत सेवा व महात्माओं की सेवा में लगा है, वह नष्ट नहीं होता है। राम जी का जन्मोत्सव भव्य तरीके से मनाया गया। कथा का समापन आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ : प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया










