श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर देवली में मुनि 108 वैराग्य सागर महाराज एवं मुनि 108 सुप्रभ सागर महाराज के सानिध्य में आष्टानिका महापर्व के पांचवे दिन 128 अर्घ समर्पित किये गए।
मुनि सुप्रभ सागर ने कहा कि श्री सिद्धचक्र मंडल विधान के पाँचवें वलय में 128 अर्घ होते हैं और इसमें 108 प्रकार के पापाश्रव (पाप के आने के मार्ग) के निवारक अर्घ समाहित होते हैं। यह भाग जीव को पाप कर्मों से बचाने और आत्मशुद्धि की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर अभिषेक ,शांति धारा, मुनि के पाद प्रक्षालन ओर शास्त्र भेंट आदि कार्यक्रम हुए। विधान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर भगवान जिनेन्द्र देव की आराधना की तथा विश्व शांति, समाज की उन्नति एवं समस्त प्राणियों के कल्याण की मंगलकामना की।
श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के पांचवे दिन 128 अर्घ समर्पित










