देवली के श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे मुनि वैराग्य सागर एवं मुनि सुप्रभ सागर महाराज के विद्या वर्धन वर्षायोग में आयोजित धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि सुप्रभ सागर ने जिनालय एवं पूजा का महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि आज के युग में भगवान के दर्शन नहीं हो सकते है इसलिए ही हमें जिनालयों को समोशरण मानकर पूजा करनी चाहिए तथा भगवान अभिषेक के साथ पूजा करके मोक्ष की प्राप्ति कर सकते है। भगवान की परिक्रमा करने से कर्म की निर्जरा होती है। जिन धर्म की वास्तविक आराधना आचरण से संभव है वस्तु का स्वभाव ही धर्म है। क्रोध लोभ में हम आत्मा से बाहर हो जाते है जबकि जिन धर्म आत्मा में रहने का मार्ग देता है। मुनि ने कहा कि सम्बन्ध हमेशा समान धर्म, ओर समान स्तर वाले परिवार में होना चाहिए केवल गुणों के मिलान पर्याप्त नहीं है कथनी और करनी हमेशा एक समान होनी चाहिए। पवित्र चिंतन, शुद्ध आचरण,ओर सम्यक दृष्टि से ही आध्यात्मिक उत्थान हो सकता है। इसके बाद महाराज की आहार चर्या ओर नित्य दोपहर धर्म की कक्षाएं संचालित की गई। सायं काल मुनि के द्वारा श्रद्धालुओं की शंका समाधान की गई, 48 दिन तक लगातार भक्तांबर का पाठ किया जा रहा है।
पूजा परिक्रमा और शुद्ध आचरण से ही सधेगा आत्म कल्याण- मुनि सुप्रभ सागर










