देवली शहर में जलदाय विभाग की लापरवाही अब सामान्य समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला बन चुकी है। शहर के पटेल नगर क्षेत्र में करीब दो माह से मुख्य जलापूर्ति पाइपलाइन फटी हुई है, जिसके चलते प्रतिदिन सैकड़ों लीटर पानी सड़क पर व्यर्थ बह रहा है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जहां पाइपलाइन क्षतिग्रस्त है, उसी स्थान के आसपास से मुख्य नाली भी बहती है, जिससे नाली का दूषित पानी रिवर्स होकर पेयजल लाइन में मिलने की आशंका बनी हुई है।
यह क्षतिग्रस्त पाइपलाइन पंचायत समिति के पीछे, नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष जितेंद्र सिंह चौधरी के निवास के सामने स्थित है। सूचना के बाद भी इतने लंबे समय से बनी इस गंभीर समस्या की ओर जलदाय विभाग का ध्यान नहीं जाना, विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। हाल ही में इंदौर में दूषित पानी के कारण कई लोगों की मौत की खबरें सामने आने के बाद भी देवली में प्रशासन का उदासीन रवैया समझ से परे है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नाली का गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल जाए, तो जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
क्षेत्रीय पार्षद छाया चौधरी सहित स्थानीय नागरिकों ने इस समस्या को लेकर जलदाय विभाग को कई बार मौखिक व लिखित रूप से अवगत करवाया, लेकिन अब तक न तो पाइपलाइन की मरम्मत की गई और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। स्थानीय लोगों में विभाग की इस लापरवाही को लेकर गहरा रोष है। निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते पाइपलाइन की मरम्मत नहीं की गई और दूषित पानी की आपूर्ति से कोई जनहानि या बीमारी फैली, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जलदाय विभाग व संबंधित अधिकारियों की होगी। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या देवली प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है, या इंदौर जैसी घटना के बाद भी सबक लेना जरूरी नहीं समझा जा रहा?
इंदौर की घटना के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, देवली में दो माह से फटी है मुख्य पाइपलाइन, दूषित जल से जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा










