देवली के श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में 2 मई को गणाचार्य 108 विराग सागर महाराज के 64 वें अवतरण दिवस पर श्री जिनसहस्त्रनाम महामंडल विधान एवं 3 मई को 15 वां गणिनी पदारोहण दिवस महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 विज्ञाश्री माताजी ससंघ मन्दिर में विराजमान है।
प्रतीक जैन सेठी ने बताया कि गुरु माँ की दैनिक चर्या में मौन साधना, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण, सामायिक, मंत्र साधना एवं उपवास जैसे विविध तपों का समावेश है। प्रातःकालीन देववंदना व सहस्त्रनाम की भक्ति के रसास्वादन से ही दिन की शुरुआत होती है। अध्यक्ष संजय जैन ने बताया कि गुरु माँ ने जन समूह को संबोधित करते हुए कहा कि बीज को फल बनने का इंतजार करना पड़ता है, वैसे ही भक्ति का फल पाने के लिये इंतजार करो। इंतजार का फल मीठा होता है। इस शरीर से पूजा, भक्ति, सेवा, उपकार, दान आदि शुभ कार्य करके जीवन सफल बनाओ। अच्छा करोगे तो अच्छा एवं बुरा करोगे तो बुरा फल मिलेगा। तात्कालिक फल चाहिये तो घास-फूस मिलेगी और उत्तम फल नारियल जैसा चाहिए तो इंतजार करना पड़ेगा।
विराग सागर का अवतरण दिवस एवं गणिनी पदारोहण दिवस महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा










