देवली के श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में विराजमान भारत गौरव गणिनी गुरुमाँ विज्ञाश्री माताजी ने श्रावकों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें खुद को हर तरह के संदेह से मुक्त रखने के लिए अपने दिल, दिमाग, मन व मस्तिष्क को निर्मल रखना होगा।
उन्होंने कहा कि इसके लिए अपनी इंद्रियों को नियंत्रित रखते हुए जीवन में सदैव संयम बरतना होगा। इस जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमें खुद पर भरोसा होना चाहिए। जिसे अपने पर भरोसा नहीं, वह किसी दूसरे पर कैसे विश्वास करेगा। ऐसे व्यक्ति का जीवन संदेहों से बोझिल हो जाएगा। उसका एक पूर्ण, सुंसबद्ध, एकीकृत और स्वस्थ व्यक्तित्व के रूप में विकास नहीं हो पाएगा। इसी वजह से जीवन में ऐसा मार्ग अपनाया जाना चाहिए, जिसमें कोई संदेह न रहे। संदेहों से मुक्त रखने के लिए दिल और दिमाग, मन और मस्तिष्क को साफ और पवित्र रखना आवश्यक है। इस शुद्धता और पवित्रता को प्राप्त करने के लिए आपको अपनी दृष्टि को, वाणी को, संपूर्ण इंद्रियों को अपने नियंत्रण में रखना होगा तथा जीवन में सदैव संयम बरतना होगा। उन्होंने कहा कि जब आप कोई बुरा काम कर डालते हैं तो उसके पूर्व कुछ न कुछ ऐसा कृत्य अवश्य होता है, जिसमें आपकी आँखों ने कुछ बुरा देखा हो, कुछ बुरे शब्द सुने हों, जिसकी वजह से आपका मन उत्तेजित हो गया हो, या कुछ ऐसा अनुभव किया हो, जिसके कारण आप अपने मन का संतुलन खो बैठे हों। इस प्रकार व्यक्ति जीवन भर उलझनपूर्ण परिस्थितियों में घिरा रहता है। यदि हम इस बात को लेकर सजग रहें कि हम न बुरा देखेंगे, न बुरा सुनेंगे और न बुरा बोलेंगे तो अपने मन और विचारों को, दिल और दिमाग को शुद्ध व पवित्र बना सकते हैं। हमारे मन की क्रिया-प्रतिक्रिया हमारी ज्ञानेन्द्रियों के किसी घटना, कार्य या विचार से हुए संपर्क पर निर्भर करती है। इसके फलस्वरूप हमारे विचारों में जो दूषण पैदा होता है तथा खराबी आती है, वह बेहद खतरनाक होती है। आँख से टपका आँसू और नजरों से गिरा इंसान कभी उठ नहीं सकता। प्रतीक जैन सेठी ने बताया कि 2 मई को शाम 6:30 से णमोकार दीपअर्चना के 35 बीजाक्षर से दीप प्रज्ज्वलित होंगे एवं 64 दीपकों से महाआरती का कार्यक्रम किया जाएगा।
आँख से टपका आँसू और नजरों से गिरा इंसान कभी उठ नहीं सकता - विज्ञाश्री माताजी










