देवली उपखंड के कल्याणपुर ग्राम में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में गुरुवार को भगवान कृष्ण लीला का वर्णन किया गया।
कथा वाचक पण्डित तुलसी राम शास्त्री ने कथा सुनाते हुए कहा कि मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है यहीं परमात्मा की नीयति होती है। इस अवसर पर पूतना वध अकासुर बकासुर तृणावर्त केशी जैसे बड़े राक्षसों का वध, भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन, गोकुल में कृष्ण द्वारा गाय चराने और गोप ग्वालों के साथ बछड़े चराने का सजीव वर्णन किया गया। कथा में भगवान कृष्ण के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हूए कहा कि मनुष्य को कर्म करने में विश्वास रखना चाहिए उसके फल की कभी इच्छा नहीं करना चाहिए। कथा में भगवान कृष्ण लीला में राधा कृष्ण की झांकी सजाई गई। कालिया नाग का दमन, गोर्वधन पुजा और इन्द्र का मान मर्दन ब्रम्हा के अभिमान तोड़ने, श्री दामा सहित अन्य बाल गोपाल के संग गोकुल की गलियों में खेलने सहित अन्य लीलाओं का वर्णन किया। कथा सुनाते हुए कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है इसलिए कर्म अच्छे होना चाहिए। राजा कंस के कर्म बुरे होने से उसका भगवान ने वध किया भगवान कृष्ण का अवतार 24 अवतार में सबसे बड़ा अवतार है। वे योगियों के भी योगी है उनके बराबर कोई भी योगी नहीं है। उन्होंने कोरवो पांडवों की कथा जरासंध के साथ युद्ध कालिववन की कथा राजा मुकचन्द की कथा विस्तार से सुनाई।
भागवत कथा में कृष्ण लीला का वर्णन किया, राधा कृष्ण की सजीव झांकी ने मन मोह लिया










