देवली के अटल उद्यान स्थित टीनशैड प्लेटफार्म पर चल रही 15 दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ महामहोत्सव में कथा वाचन कर रहे महामंडलेश्वर 1008 दिव्य मुरारी बापू ने कहा कि हनुमान का अर्थ है, जिसने अपने मान का हनन किया हो, जो अभियान शून्य है, वही हनुमान है।
नवधा भक्ति की विवेचना करते हुए बताया कि प्रथम भक्ति संतों का संग, दूसरी भक्ति भगवान की कथा में प्रेम, गुरु महाराज की सेवा बिल्कुल अमान होकर तीसरी भक्ति बताया। चौथी भक्ति छल कपट का त्याग करके भगवान का गुणगान करना, पांचवी भक्ति दृढ़ विश्वास के साथ मंत्र जप। छठवीं भक्ति धीरे-धीरे संसार से मन को हटाकर भगवान में लगाना। सबमें भगवान का दर्शन करना, संतो के प्रति बहुत सम्मान का भाव रखना सातवीं भक्ति बताया। आठवीं भक्ति यथा लाभ संतोष, जो कुछ अपने परिश्रम से ईश्वर की कृपा से प्राप्त हो, उसमें संतोष रखना और किसी में दोष दर्शन न करना और नवमी भक्ति सरल जीवन, छल कपट से रहित जीवन और भगवान पर भरोसा करना है। कथा का समापन आरती व प्रसाद वितरण के साथ हुआ। सोमवार को कथा समापन के लिए आयोजित यज्ञ में श्रद्धालुओं ने पूर्णाहुति दी।
श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ का हुआ समापन, श्रद्धालुओं ने दी पूर्णाहुति










