देवली में आचार्य 108 वर्धमान सागर महाराज का 37 वा आचार्य पदारोहण मुनि 108 वैराग्य सागर महाराज एवं मुनि 108 सुप्रभ सागर महाराज के सानिध्य में धूमधाम ओर भक्ति से मनाया गया।
इस अवसर पर प्रातः संगीतमय गुरुपूजा एवं गुणानुवाद सभा का आयोजन किया गया जिसमें महाराज ने मंगल प्रवचन करते हुए कहा कि आचार्य का गुणानुवाद करना साक्षात संयम और वात्सल्य की वंदना करने के समान है। आचार्य को संपूर्ण जैन समाज में वात्सल्य वारिधि (करुणा और स्नेह का समुद्र) कहा जाता है। दिगंबर जैन मुनि परंपरा के कठोरतम सिद्धांतों के अक्षुण्ण पालक है। वर्तमान में 36 से अधिक साधुओं के विशाल संघ का अनुशासन और कुशलतापूर्वक संचालन करना उनकी नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है। कार्यक्रम में चित्र अनावरण, पाद प्रक्षालन एवं शस्त्र भेंट किया गया। कार्यक्रम में सकल दिगंबर समाज के लोगो ने भाग लिया।
जैन श्रदालुओं ने वर्धमान सागर का आचार्य पदारोहण कार्यक्रम भक्तिभाव से मनाया











