देवली के जैन मंदिर में चल रहे दस लक्षण पर्व के द्वितीय दिन उत्तम मादेव धर्म पर उपदेश देते हुए मुनि सुप्रभसागर महाराज ने कहा कि जब तक अहंकार व अकड़ है तब तक उन्नति, शान और समृद्धि की प्राप्ति नहीं होगी। विनय गुण से मुक्ति की प्राप्ति होती है तथा मान कषाय व्यक्ति को किसी के सामने भी झुकने नहीं देती है।
मुनि ने आगे कहा कि मैं की हवा जिसे लग जाती है, उसे कोई दवा और दुआ काम नहीं करती है। विनय गुण से ज्ञान में वृद्धि के साथ चारित्र ग्रहण की भावना उत्पन्न होती है। ऊँचा उठने के लिए झुकना अनिवार्य है, जैसे चीता ऊँची और लम्बी छलांग लगाने के लिए पहले आगे दोनों के पैरों पर झुकता है। मृदुभाव को धारण करने, वाला जल के समान सबको अपने में समाहित कर लेता है और अहंकारी व्यक्ति पत्थर की तरह पृथक रह जाता है। धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए मुनि वैराग्यसागर महाराज ने कहा कि आज व्यक्ति भौतिक साधनों में इतना उलझा हुआ है कि देव शास्त्र गुरु की विनय भी ठीक से नहीं करता है और चाहता है कि हमें आशीर्वाद मिले। घर में भी विनय गुण नहीं होने के कारण कलह बढ रही है। प्रत्येक शहर गाँवों में तलाक के केस बढ रहे है। जिसके पास विनय गुण है, उसे बडे-बुजुर्गो का आशीष मिलता है वह उन्नति करता है। इस मौके पर मूल नायक महावीर स्वामी, शांतिनाथ भगवान, पारसनाथ भगवान का अभिषेक, शांति धारा एवं संध्याकालीन महा आरती की गई।
मैं की हवा लगने पर कोई दवा और दुआ काम नहीं करती है - जैन मुनि










