Ajay AryaAjay Arya 21-Sep-2026
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अपने आपको नियंत्रित करने हेतु संयम की आवश्यकता होती है - जैन मुनि 

अपने आपको नियंत्रित करने हेतु संयम की आवश्यकता होती है - जैन मुनि 

देवली के जैन मंदिर में चल रहे दश लक्षण पर्व के छटवें दिन उत्तम संयम धर्म पर प्रवचन देते हुए मुनि सुप्रभसागर ने कहा कि ऊंट को नियंत्रित करने हेतु नकेल, घोडे हेतु लगाम गाडी हेतु ब्रेक की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य को अपने आपको नियंत्रित करने हेतु संयम की आवश्यकता होती है। जो व्यक्ति स्वयं के नियंत्रित कर लेता है, संसार उसके नियन्त्रण में अपने आप आ जाता है।
मुनि श्री ने कहा कि आज व्यक्ति का स्वयं की इन्द्रिय और मन पर नियंत्रण नहीं होने के कारण शारीरिक कष्ट प्राप्त कर रहा है। एक-एक इन्द्रिय के विषय में फस कर एक-एक प्राणी अपने प्राणों को संकट में डाल देता है। जिसने संयम को अपनाया वह दुर्गति को प्राप्त नहीं होता है। संयम शब्द कह रहा है, जो संहार करे, यम-मृत्यु का, वह संयम है। बस आज व्यक्ति बन्धन में नहीं बंधना चाहता है और संयम, नियम उसे बन्धन लगते है, परन्तु संयम का बन्धन संसार के बन्धन को नष्ट करने वाला है। फिर जो पाँचों इन्द्रियों के विषय को भोगता है, उसका क्या होगा। प्रातःकाल मंदिर में शांति धारा ओर अभिषेक हुआ इसके बाद उपवास करने वाले का सामूहिक पारणा हुआ, दोपहर बाद महाराज ससंघ सभी शिविरार्थी के साथ देवली के सभी जिनमंदिर की वंदना की ओर धूप का क्षेपण की।
 


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