देवली के जैन मंदिर में विराजमान मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान शान्ति देने वाले नहीं है, वे शान्ति की प्राप्ति का मार्ग बताते है। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही आत्म में शान्ति की प्राप्ति की जा सकती है।
मुनि ने कहा कि शान्ति की प्राप्ति के लिए जीवन में तीन फेक्ट्री लगाने की आवश्यकता है। मुख में शुगर फेक्ट्री, हृदय में लव फेक्ट्री तथा दिमाग में आईस फेक्ट्री लगाने से जीवन में शान्ति आती है। जब भी बोलो मीठा बोलो, सभी के प्रति वात्सल्य भाव रखो और दिमाग को ठण्डा रखो, तो अशान्ति पास नहीं आ सकती है। आज व्यक्ति शान्ति की प्राप्ति करना चाहता है, परन्तु उसके अनुसार अपने आपको ढालना नहीं चाहता है। आज व्यक्ति के पास सोफा सेट है, डिनर सेट है, डायमण्ड सेट है परन्तु उसका माईण्ड सेट नहीं है। माईण्ड अपसेट होने के कारण ही अशान्ति हो रही है। अपने दिमाग के विचारों को व्यवस्थित करने की आवश्यकता है। सभा को सम्बोधित करते हुए मुनि वैराग्य सागर ने कहा कि जो तनाव में रहता है, संक्लेश परिणाम करता है, उसका अकाल मरण होता है। संक्लेश परिणाम के कारण दुविधा बढ जाती है। सुविधा की प्राप्ति के लिए व्यक्ति संक्लेश करता है और वही सुविधा की चिन्ता दुविधा का कारण बन जाती है। संसार की सबसे बड़ी सम्पदा आत्मशांति है। जिन परिणाम या वस्तु से अशान्त परिणाम हो रहे है उन्हें त्याग करने के आवश्यकता है। प्रतिकूलताओं में भी अनुकूलता की खोज करने वाला ही साधक कहलाता है।
भगवान शान्ति देने वाले नहीं है, वे शान्ति की प्राप्ति का मार्ग बताते है - जैन मुनि










