देवली नगरपालिका में लाइट टेंडर पर घमासान, उपाध्यक्ष ने 48 लाख के प्रस्ताव को बताया 42 लाख का नुकसान
निरस्त प्रस्ताव पर दोबारा साइन कराने का आरोप, प्रेस वार्ता कर जताया विरोध
देवली नगरपालिका का वार्षिक लाइट रिपेयर टेंडर विवादों के घेरे में आ गया है। नगरपालिका में वर्तमान में 47,700 रुपये प्रतिमाह यानी सालाना करीब 5.50 लाख रुपये में चल रहे लाइट रिपेयर के ठेके को बढ़ाकर 4 लाख रुपये प्रतिमाह यानी 48 लाख रुपये सालाना में देने के प्रस्ताव को लेकर उपाध्यक्ष नेमीचंद जैन ने मोर्चा खोल दिया है। मंडल की बैठक में सभी पार्षदों ने इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से निरस्त कर दिया था, जिसके बाद अध्यक्ष ने बैठक समाप्ति की घोषणा की थी। उपाध्यक्ष का आरोप है कि बैठक के दूसरे ही दिन अध्यक्ष प्रतिनिधि द्वारा घर-घर जाकर पार्षदों को भ्रमित कर उसी निरस्त टेंडर को वापस देने वाले लेटर पर दबाव बनाकर साइन कराए जा रहे हैं। इसके लिए लाइट ठेकेदार खुद पार्षदों को फोन कर रहा है। प्रेस वार्ता में उपाध्यक्ष ने बताया कि 48 लाख के ठेके को सही ठहराने के लिए सिर्फ एक अतिरिक्त शर्त जोड़ी गई है कि रिपेयर का सामान ठेकेदार देगा। जबकि सच्चाई यह है कि रिपेयर में मुख्य रूप से बल्ब लगता है जिसकी 2 साल की गारंटी कंपनी खुद देती है। बड़ी खराबी होने पर पूरी लाइट बदली जाती है और नई लाइट नगरपालिका अपने खुद के फंड से खरीदकर ठेकेदार को देती है। इतना ही नहीं, इस ठेके में ठेकेदार देवली के 35 वार्डों में न तो नई रोड लाइट लगाएगा, न नया बिजली पोल लगाएगा और न ही नए तार की लाइन डालेगा। ये सभी काम पालिका फंड से ही होने हैं। जब सारा बड़ा खर्चा पालिका खुद उठा रही है तो साढ़े पांच लाख के ठेके को 48 लाख में देकर हर साल 42 से 42.5 लाख रुपये का सीधा नुकसान क्यों पहुंचाया जा रहा है, यह जनता के पैसे के साथ खिलवाड़ है। उपाध्यक्ष ने बताया कि नियम के अनुसार एक बार निरस्त प्रस्ताव को विशेष परिस्थितियों के अलावा तीन महीने तक बदला नहीं जा सकता। उपाध्यक्ष ने कहा कि अगर इस तरह गलत तरीके से टेंडर किया गया तो इससे विधायक राजेन्द्र गुर्जर की साफ छवि और सभी पार्षदों की इज्जत पर लांछन लगेगा। उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि देवली की जनता के खून-पसीने की कमाई का सवाल है।
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नगरपालिका में लाइट टेंडर पर घमासान, उपाध्यक्ष ने 48 लाख के प्रस्ताव को बताया 42 लाख का नुकसान










