देवली की तेजाजी कॉलोनी में अर्धनारीश्वर शिव प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत शिवपुराण कथा के पांचवें दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े कथा वाचिका पूजा बैरागी ने अपने प्रवचनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
कथा वाचिका ने भगवान शंकर के त्रिशूल के आध्यात्मिक महत्व को समझाते हुए कहा कि त्रिशूल केवल एक अस्त्र नहीं, बल्कि जीवन का संदेश है। बैरागी ने बताया, काम, क्रोध और लोभ पर नियंत्रण ही त्रिशूल का अर्थ है। जो व्यक्ति इन तीनों विकारों को नियंत्रित कर लेता है, वही सच्चे अर्थों में शिव स्वरूप बन जाता है। कथा में कार्तिकेय जन्म, गणेश जन्म और रिद्धि-सिद्धि की झांकी का वर्णन किया गया। कथा वाचिका ने शिव परिवार की दिव्यता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान शिव केवल देवों के देव नहीं, बल्कि जीवन के मार्गदर्शक भी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सपने में शंकर जी के दर्शन होना शुभ संकेत माना जाता है, जो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है। इस अवसर पर आयोजनकर्ता पायल बाई किन्नर का शहर की महिलाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा स्वागत एवं सम्मान किया गया। श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को शहर के लिए आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण बताया।
अर्धनारीश्वर शिव प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव : आयोजक पायल बाई का सामाजिक संगठनों ने किया सम्मान










