देवली में मुनि 108 वैराग्य सागर महाराज एवं मुनि 108 सुप्रभ सागर महाराज के पावन सान्निध्य में विद्या वैराग्य वर्धन वर्षायोग–2026 के अंतर्गत गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया।
कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में श्रीफल, पुष्प एवं आरती अर्पित कर गुरु भक्ति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। इसके बाद वैदिक एवं जैन परंपरा के अनुरूप मंत्रोच्चार के मध्य कलश स्थापना की गई जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं परिवारों ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया। कलश स्थापना के साथ ही आगामी चातुर्मास के धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मुनि ने अपने प्रवचनों में कहा कि गुरु जीवन के अंधकार को दूर कर आत्मकल्याण का मार्ग दिखाते हैं। चातुर्मास आत्मचिंतन, संयम, स्वाध्याय, तप एवं धर्म साधना का श्रेष्ठ अवसर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से चातुर्मास के दौरान अधिकाधिक धार्मिक गतिविधियों में भाग लेकर अपने जीवन को संस्कारित बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का आयोजन श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर एवं धर्मशाला ट्रस्ट, देवली के तत्वावधान में एवं सकल जैन समाज देवली के सहयोग से गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ।
चातुर्मास कलश स्थापना की, जैन मुनियों के सानिध्य में हुआ आयोजन










