Ajay AryaAjay Arya 23-Sep-2026
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दान करना सरल है, पर त्याग करना कठिन लगता है - जैन मुनि

दान करना सरल है, पर त्याग करना कठिन लगता है - जैन मुनि

देवली के जैन मंदिर में चातुर्मास कर रहे मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने उत्तम त्याग धर्म पर उद्बोधन देते हुए कहां कि जो त्याग करता, वह हल्का होकर ऊपर की ओर उठता जाता है। त्याग के बिना लौकिक जीवन भी नहीं चलता है। 
उन्होंने कहा कि मुनिराज त्याग के कारण ही पूज्यता को प्राप्त होते हैं। प्रकृति भी हमें त्याग का संदेश देती है। मुनि ने कहा कि दान करना सरल है, पर त्याग करना कठिन लगता है, परन्तु त्याग से सुख-शान्ति की प्राप्ति होती है। यदि मेघ पानी का त्याग नहीं करे, तो वह स्वच्छ नहीं हो सकता, वृक्ष पत्ते-फल का त्याग नहीं करें तो उसका विकास नहीं हो पायेगा। संग्रह करने वाला कष्ट पाता है और अनुपयोगी हो जाता है। समुद्र जल का संग्रह करके रखता है, इसलिए खारा हो जाता है। दान पर की अपेक्षा रखता है, पर त्याग स्वाचित होता है। जो जो त्याग करते जाते हैं, वह मुक्ति के उतने निकट पहुंच जाता है। जो त्याग के महत्त्व नहीं जानता, वही उससे डरता है। त्याग से शरीर और आत्मा दोनों स्वस्थ रहते हैं। दान श्रावकों द्वारा गृहस्थी में अर्जित पाप को धोने का साधन है। जैसे रक्त को पानी धो देता है।


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