देवली उपखंड के आवा ग्राम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के छठे दिन रुक्मणी विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण और सजीव वर्णन किया गया। कथा व्यास पूज्य पंडित ऋषिराज शर्मा के मुखारविंद से कथा का रसपान करने के लिए पांडाल में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
कथा के छठे दिवस पर पंडित ऋषिराज जी शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल-लीलाओं, कंस वध, मथुरा गमन और द्वारका स्थापना के प्रसंगों का मार्मिक चित्रण किया। इसके उपरांत उन्होंने जैसे ही श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाया, पूरा पांडाल ‘द्वारकाधीश भगवान की जय’ और ‘राधे-राधे’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। कथा पांडाल में भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी के विवाह की मनमोहक झांकी सजाई गई। गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ भगवान की बारात निकाली गई, जिस पर उपस्थित भक्तजनों ने पुष्पवर्षा की। कार्यक्रम के दौरान मुख्य यजमान सहित समस्त ग्रामवासियों ने व्यासपीठ का पूजन-अर्चन कर आरती उतारी।
श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन धूमधाम से संपन्न हुआ रुक्मणी विवाह, भक्ति रस में झूमे श्रद्धालु











